Wednesday, November 26, 2008

आ रही मेरे सीने , से सदा है कोई
कराह रही इस्मे ,शायद दुआ है कोई

बेचैन रातों में ,आवाज़ ये आती है
कई दीनो से तुझसे , खफा है कोई

सुना सुना सा लगता है, दील मेरा
छोड़ कर के इसे ,शायद गया है कोई

महब्बत की दुनीया,बड़ी अजीब होती है
दील कोई तोडे,और कहे बेवफा है कोई

ज़िन्दगी में कुछ ,अधुरा सा लगता है
पीछे छुट गया , एक लम्हा है कोई

रौनके-बज्म के लोग,भला क्या जानेंगे
मोहब्बत के शहर में,कितना तनहा है कोई

उनके पल्लू को ,कंधें से गीरा गयी है पर
क्या करे वो, बड़ी बेशरम हवा है कोई

जातें हो तो ज़रा ,संभल के रहना दोस्त
उनके शहर में , हर रोज लुटा है कोई

मेरे सीने में धधकते है शोले, अक्सर ही
मेरी बाँहों में आ के , पीघला है कोई

कभी अपने घरों में, भी आया जाया करो
'असर' उनमे भी ,देखना छुपा है कोई



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